- World Wide
- International
- National
- State
- Union Territory
- Capital
- Social
- Political
- Legal
- Finance
- Education
- Medical
- Science & Tech.
- Information & Tech.
- Agriculture
- Industry
- Corporate
- Business
- Career
- Govt. Policy & Programme
- Health
- Sports
- Festival & Astrology
- Crime
- Men
- Women
- Outfit
- Jewellery
- Cosmetics
- Make-Up
- Romance
- Arts & Culture
- Glamour
- Film
- Fashion
- Review
- Satire
- Award
- Recipe
- Food Court
- Wild Life
- Advice
जनसंख्या आधारित ‘सीरो-सर्वेक्षण’ से कोरोना संक्रमण के व्यापकता की होगी निगरानी
- by
- May 22, 2020
- 3625 views
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिशानिर्देश की जारी
• प्रत्येक जिले के 6 सरकारी एवं 4 निजी स्वास्थ्य संस्थान होंगे शामिल
• संक्रमण की निगरानी के लिए प्रति सप्ताह 200 से 800 सैंपल होंगे एकत्रित
भागलपुर/ 22 मई: कोरोना संक्रमण के प्रसार के ट्रेंड को समझने एवं इसकी व्यापकता की निगरानी के मद्देनजर देश के चयनित जिलों में जनसंख्या आधारित ‘सीरो-सर्वेक्षण’ किया जाएगा. इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने दिशानिर्देश जारी कर इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है. दिशानिर्देश के अनुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर) एवं रष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र अन्य मुख्य हित-धारकों सहित राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर देश के चयनित जिलों में ‘सीरो-सर्वेक्षण’ करेगा.
निगरानी इकाई के लिए जिले के 10 स्वास्थ्य केन्द्रों का होगा चयन:
निगरानी इकाई स्थापित करने के लिए प्रत्येक चयनित जिले के 10 स्वास्थ्य केन्द्रों का चयन होगा. जिसमें 6 सरकारी एवं 4 निजी स्वास्थ्य केन्द्रों को शामिल किया जाएगा.
प्रति सप्ताह 200 से 800 सैंपल होंगे एकत्रित:
‘सीरो-सर्वेक्षण’ संपादित करने के लिए दो तरह की आबादी समूहों का चयन किया गया है. जिसमें कम जोखिम वाली आबादी में आउटडोर मरीज एवं गर्भवती महिला तथा अधिक जोखिम वाले आबादी में संक्रमितों की देखभाल एवं उपचार में जुटे स्वास्थ्य कर्मी को शामिल किया गया है. जिले के अधिक जोखिम वाली आबादी से प्रति सप्ताह 100 से 400 सैंपल एकत्रित किये जाएंगे. वहीं जिले के कम जोखिम वाली आबादी के आउटडोर मरीजों से प्रति सप्ताह 50 से 100 सैंपल एवं गर्भवती महिलाओं से भी 50 से 100 सैंपल एकत्रित किये जाएंगे. इस तरह जिले के संक्रमण की निगरानी के लिए प्रति सप्ताह में कुल 200 से 800 सैंपल एकत्रित किये जाएंगे.
व्यक्तिगत रोग की निदान की जगह संक्रमण की निगरानी पर होगा जोर:
जारी गाइडलाइन्स में मंत्रालय ने बताया है कि नमूनों का परिक्षण एक बार में केवल 25 नमूनों के पूल में किया जाएगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन सभी नमूनों का परिणाम केवल निगरानी के उद्देश्य से किया जाएगा एवं इसका उपयोग किसी भी तरह से व्यक्तिगत रोग निदान की दृष्टि से नहीं होगा. गाइडलाइन्स में यह भी बताया गया है कि नाक एवं गले के स्वैब्स आरटी-पीसीआर(रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन- पोलीमीरेज चेन रिएक्शन) के लिए लिए जाएंगे. बताते चलें कि आरटी-पीसीआर टेस्ट मुख्यतः कोरोना संक्रमण की पुष्टि के लिए की जाती है. नाक एवं गले के स्वैब्स के अलावा, एलिसा परिक्षण के लिए आईजीजी एंटीबाडी का पता लगाने के लिए, रक्त के नमूने भी एकत्रित जिए जाएंगे. निगरनी उद्देश्य के लिए अगले दौर में आईजीजी एलिसा आधारित सीरम नमूनों का परिक्षण आरटी-पीसीआर आधारित परिक्षण लेगा.
ऐसे होगा आंकड़ों का संग्रहण एवं विश्लेषण:
ओपन डेटा किट(ओडीके) प्लेटफार्म की सहायता से जनसांख्यिकी विशेषताओं पर आधारित आंकडे विशेष रूप से डिजायन किये गए मानक डाटा कलेक्शन फॉर्म में एकत्रित किये जाएंगे. सीरो-सर्वेक्षण के तहत संग्रहित किये गये आंकड़ों के मानक संकेतक प्रारूपों का उपयोग करके कार्रवाई के लिए इसका स्थानीय रूप से विश्लेषण किया जाएगा. इसके बाद जगह, व्यक्ति एवं समय विश्लेषण के लिए संकेतक भी बनाए जाएंगे. साथ ही आईसीएमआर तथा स्वास्थ्य एवं परिवार विकास मंत्रालय द्वारा आंकड़ा संग्रहण सहित आंकड़ों को जारी करने संबंधी निर्णय लिए जाएंगे
संबंधित पोस्ट
CPJ Group of Institutions to Welcome New Batch with Grand Orientation Programme 2026
- Aug 06, 2026
- 13 views

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Premier World (Admin)